संध्या जैन
व्याख्याता -- रा.उ.मा.वि. झिराना, टोंक
सीखने के सारे दरवाजे
सीखने के सारे दरवाजे
बड़ी सावधानी से बन्द कर दिए हैं उन्होंने
और उनके इशारों की परछाइयों ने चुपके से, रातों रात सफेदी पोत दी है..
दरवाजें बड़ी सफाई से दीवारें हो गए है !
और आगे जाने के तीर को, किसी ने नजर बचाकर
उल्टी दिशा में कर दिया है ।
लोग सब इठला रहे हैं..
क्यूँकि उनकी समझ में वे आगे जा रहे है..
और सब झूठ कहने वाले_सबको जेल में डाल दिया गया है ।
वो जो कहते थे कि यहाँ तो सीखने के दरवाजें थे..
थे, तो कहाँ गए.. !!
सोचने पर भी रोक है..
बोलना तो खैर, पाप है ही ।
सबसे अच्छा सीखना: सुनना रखा गया है ।
खासकर बच्चों और महिलाओं के लिए..
सीखने के दरवाजों के पार तरह तरह के खतरे है ।
किससे – उन्ही से – जिनसे यहाँ भी है ।
नाम कमाने की लालसा
सूरज नही पैदा हुआ होगा
नाम कमाने की लालसा के साथ,
चाँद अपनी ख्याति के लिए नही फैलाता है चांदनी,
ना ही नदियाँ प्रसिद्धि पाने के लिए बहती है अनवरत,
न समुद्र चाहता है अपने नाम के गीत,
पर्वत भी यश बटोरने नही बने है प्रहरी सीमाओ के,
न धरती ने मांगा है गुणगान बड़प्पन का, पैरों तले आने के बदले,
ये सब बस है..
है.. जैसे ईश्वर.. जो नही चाहता उसके महान होने के दावे,
ईश्वर या उसकी कोई कृति नहीं चाहती कि उनके नामों के ढोल पीटे जाए
सिवाय मनुष्य के….!!

1 टिप्पणी:
Nice heart touching
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